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Ladka Kaise Paida Hota Hai पुत्र प्राप्ति असरदार उपाय

Ladka Kaise Paida Hota Hai पुत्र प्राप्ति असरदार उपाय:

सनातन हिन्दू धर्म हो अथवा अन्य पंथ (उदाहरणार्थ, बुद्ध, पर्सियन, ईसाई, मोहम्मद पंथ इत्यादि) के अनुयायी अथवा अनुगामी विवाहोपरांत, लक्ष्मी ‘कन्या’ के स्थान में पुत्र-प्राप्ति की मनोकामना धारण करते रहे हैं । यह सामाजिक कुरीति है, जिसे समय रहते परिणत होना अवश्यम्भावी है जहां पुत्र व पुत्री में भेद शेष नहीं रहना चाहिए । पुत्र तथा पुत्रियों को सामान अवसर दिए जाने के परिणामस्वरूप देखा गया है कि किसी भी परिवार में बेटियां श्रेष्ठ रही हैं।

Ladka Kaise Paida Hota Hai

Ladka Kaise Paida Hota Hai

परिणत समय के बहुत से रूढ़िवादी विचारधारा के अनुगामी परंपरावादी लोग वर्तमान समय में ऐसा विशवास करते मानते हैं कि वंश मात्र लड़कों से ही चलता है, यह सत्य भी है । किन्तु २१वीं शताब्दी में पुत्रियां संसार प्रत्येक क्षेत्र (विज्ञान, अर्थव्यवस्था, रक्षा, खेल, राजनीति) में चारों दिशाओं में अपनी विजय-पताका अविरल लहरा रही है तथा अपने माता-पिता के नाम को जगत में रोशन कर रही हैं ।

ऐसा देखा गया है सनातन हिन्दू धर्म को सिवाय अन्य पंथों में पुत्र-प्राप्ति के लिए लोग कई प्रकार के तंत्र-मंत्र यंत्र और टोटकों का अनुचित प्रयोग कर अपनाते हैं जो अधिकतर फलित नहीं हो पाए है तथा न ही कभी हो सकते हैं। सनातन मनीषी ब्राह्मण ऋषियों ने हिन्दू धर्मशास्त्रों व पुराणों में पुत्र-रत्न संतान की प्राप्ति के लिए कई अमोघ मंत्रों, माङ्गलिक्य उपायों इत्यादि का उल्लेख किया है, हम, यहाँ पर पुत्र-रत्न प्राप्ति के लिए अत्यंत सरल उपाय।

सनातनम जगतपिता ‘सादाशिव’ (परमपुरुष स्वरूप) व आदिशक्ति जगदम्बा ‘शिवा’ (प्रकृति स्वरूप) सयुंक्त अर्धनारेश्वर परमेश्वर रूप के द्वारा ब्रह्माण्ड तथा चतुर्युगों (सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग) के सृष्टि किए जाने के पश्चात से ही मानव समाज पुरुष-प्रधान माना जाता है ।

Ladka Kaise Paida Hota Hai का सरल मंत्र

संतान-प्राप्ति की अभिलाषी स्त्री प्रतिदिन स्नानादि से निवृत होकर एक माह अवधि पर्यन्त, प्रथम-पूज्य भगवान् श्री गणपति की प्राणप्रतिष्ठित प्रतिमा को बिल्ब फल समर्पण करने के उपरान्त ‘ॐ पार्वतीप्रियनन्दनाय नम:’ मंत्र की ११ (ग्यारह बेर) माला प्रतिदिन जपने से संतान प्राप्ति होती है।

Ladka Kaise Paida Hota Hai संतान प्राप्ति के लिए उपाय मंत्र

यह उपचार केवल उन महिलाओं, जिन्हें संतान नहीं हो रही हो, के लिए नहीं है । किन्तु वे स्त्रियां जो पुत्री के जन्म देने के पश्चात एक पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखती हैं, वे भी इस उपाय को कर सकती हैं।

पुत्र प्राप्ति असरदार 45 दिनों का उपाय

इस उपाय को कम से कम 45 दिनों तक प्रतिदिन निरंतर करने से वांछित फल प्राप्ति होती है। यहां इन नारियों के अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि यह साधना किसी भी किसी भी कारण से खण्डित नहीं होनी चाहिए। अन्यथा उपाय में किसी भी प्रकार की त्रुटि अथवा कमी रहने के कारण वांछित की प्राप्ति नहीं हो पाती है, अतः निरंतर ४५ दिनों तक सच्चे मन से मंत्र का जाप करना फलदायी बनता है।

महाराजा दशरथ की पटरानी माताश्री कौशल्या की ध्यान तपस्या पर प्रसन्न जब सनातन परमात्मन् श्रीहरि ने दिव्य दर्शन दिए तो, माँ के स्वयं-तुल्य पुत्र-रत्न प्राप्ति अभिलाषा पर वरदान स्वरूप वचन देते हुए कहा मुझसम पुत्र तो मात्र स्वयं मैं ही हो सकता हूँ, अतः मैं नारायण ही महाराज दशरथ तथा रानी कौशल्या को पुत्र के रूप में प्रकट होऊँगा ।

अमर संत महात्मा गोस्वामी तुलसीदास जी ने दिव्य श्रीरामचरित मानस में पुत्र रत्न प्राप्ति के लिए निम्न अमोघ मंत्र की रचना की है ।

“प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान ।
सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान ॥”

इस सहज मंत्र के किए जाने के फलस्वरूप होगी भगवन् महानारायण श्रीकृष्ण जैसी सुन्दर सन्तान:

सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच॥”

शीघ्र संतान प्राप्ति के लिए पति-पत्नी अपने गृह में भगवान् श्रीकृष्ण जी के बालस्वरूप लड्डूगोपालजी की प्रतिमा स्थापित अवश्यम् करें ।

नि:संतान दंपत्ति के लिए विशेष गोपाल मंत्र:
अनेक पुराणों में वर्णित संतान देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:॥

जिन परिवारों में संतानसुख नहीं हो तथा कुंडली में बुध और गुरू संतान-प्राप्ति में बाधक हों, तो ऐसी परिस्थिति में पति-पत्नी दोनों को तुलसी जी की शुद्ध माला से पवित्रता के साथ ‘संतान गोपाल मंत्र’ का नित्य १०८ बार जप करना चाहिए अथवा विद्वान ब्राह्मणों के श्रीमुख से संतान गोपाल मंत्र का सवा लाख जप करवाने चाहिए:

देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:॥

अथवा

सन्तान गोपाल मन्त्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥

संतान गोपाल मन्त्र जप विधि

संतान गोपाल मन्त्र का जप श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के सुअवसर पर अथवा किसी शुभ मुहूर्त में ही प्रारम्भ करना चाहिए। इस पवित्र पाठ का प्रारम्भ किसी सुयोग्य ब्राह्मण द्वारा श्रद्धापूर्वक करवाना चाहिए यदि ऐसा संभव नही हो तो जातक स्वयं प्रारम्भ करना चाहिए। स्वयं पाठ करना अति श्रेष्ठकर माना भी जाता है। मन्त्र जप से पहले विनियोग, अङ्गन्यास तथा ध्यान करना चाहिए तदुपरांत बीजमंत्र का जप करना चाहिए।

विनियोग: श्री सन्तानगोपालमंत्रस्य श्री नारद ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः श्रीकृष्णो देवता गलौं बीजं नमः शक्ति पुत्रार्थे जपे विनियोगः।

अङ्गन्यास: देवकीसुत गोविन्द हृदयाय नमः । वासुदेव जगत्पते, शिरसे स्वाहा, देहि मे तनयं, कृष्ण शिखायै वषट, त्वामहं शरणम् गतः कवचाय हुम्, ॐ नमः अस्त्राय फट् ॥

ध्यान: निम्न मंत्रो का ध्यान जप के साथ करना चाहिए।

वैकुण्ठादागतं कृष्णं रथस्य करुणानिधिम् । किरीटसारथिम् पुत्रमानयन्तं परात्परम् ।

आदाय तं जलस्थं च गुरवे वैदिकाय च। अपर्यन्तम् महाभागं ध्यायेत् पुत्रार्थमच्युतम्॥
बीजमंत्र:

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:॥

ऊपर बताये गए विधियों के अनुसार सन्तान गोपाल मन्त्र का जप तब तक करना चाहिए जब तक आपकी मनोकामना की पूर्ति न हो जाए। मंत्र-जप के लिए तुलसी जी के माला का ही प्रयोग करना चाहिए। प्रतिदिन एक या दो माला का जप अवश्य करनी चाहिए। कुल सवा लाख मंत्र-जप किए जाने का विधान है। मंत्र-जप सफलतापूर्वक सम्पन्न होने पर कुल मंत्र के जप का दशांश हवन, तर्पण तथा मार्जन अवश्य ही करना चाहिए। इसके पश्चात कम से कम पाँच ब्राह्मणों को भोजन ग्रहण करवाने के उपरान्त उनका आशीर्वाद भी अवश्यं प्राप्त करें। तथा मन मे अटूट आस्था ही नहीं पूर्ण विश्वास धारण करें कि इस अखण्ड प्रयास के फलस्वरूप मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी, मनोरथ की सिद्धि निःसंदेह होगी।

पुत्र-प्राप्ति की इच्छा के लिए उपाय

इसके अतिरिक्त यदि पुत्री के जन्म लेने के पश्चात यदि माता को पुत्र प्राप्ति की इच्छा हो तो इसके लिए भी हिन्दू शास्त्रों में उपाय उल्लेखित हैं । यदि कन्या प्राप्ति के पश्चात माता को पुत्र प्राप्त की कामना हो तो उन्हें इस उपाय का प्रयोग करें – उत्पन्न हुई कन्या का विधिवत पूजन करें। उसे नमस्कार करें एवं बन्धु–बांधवों को खीर एवं जलेबी का भोजन कराएं। यह उपाय पुत्र प्राति के योग बनाता है।

स्त्रियां पुत्र-प्राप्ति हेतु यह निःसंदेह उपाय भी कर सकती हैं:

यहाँ स्त्री यह संकल्प करें कि “गर्भाधान होने तथा तपश्चात जब उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्ति होगी, तब वे पति-पत्नी पुत्र का ‘मुण्डन-संस्कार यहीं पर आक की छाया में बैठकर कराएंगे।”

पुत्र-प्राप्ति हेतु पति-पत्नी का पवित्र संकल्प:

इस संकल्प को पूर्ण करने वाले दंपत्ति को अवश्य ही पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। नि:संतान भी इस उपाय को करें तो फल मिलता है।

अन्य उपाय:

एक अन्य उपाय के अनुसार नि:संतान महिला को पुष्य नक्षत्र में अश्वगन्ध की जड़ को उखाड़कर गऊ माता के दुग्ध के साथ सिलबट्टे पर पीसकर, उसे दुग्धपान को अनटोक पीना है। ऋतुकाल के उपरांत शुद्ध होने पर इस दुग्ध को ग्रहण (पान करने) से स्त्री को पुत्र की प्राप्ति अवश्य होती है।

मान्यता के अनुसार पुत्र-प्राप्ति के अन्य उपाय:

अंतिम उपाय: पलाश (टेशू) के पाँच कोमल पत्ते किसी स्त्री के दुग्ध में पीसे तथा जो बांझ स्त्री मासिक धर्म के चौथे दिन स्नान करके उसे खा लेगी, वह निश्चित ही पुत्र की माता बनने का सौभाग्य प्राप्त करती है।

पुत्र पुत्री सन्तान की उत्पत्ति में विज्ञान जगत की अवधारणा (putra prapti ke vaigyanik upay)

प्रश्न: लिङ्ग नियम क्या हैं?

उत्तर: पुरुष तथा प्रकृति (स्त्री) जेंडर (लिङ्ग) रोल्स (भूमिका) को बिहेवियर (व्यवहार), वैल्यूज़ (आदर्श, मान्यताएँ) एवं एटिट्यूड (प्रवृति) के रूप में परिभाषित किये जा सकते हैं, जिसे समाज पुरुष तथा नारी दोनों के लिए उपयुक्त समझता है।

प्रश्न: कौन से अभिभावक सन्तान (बच्चे) के लिङ्ग का निर्धारण करते हैं?

उत्तर: पुरुष संतान (बच्चे) के लिङ्ग का निर्धारण इस आधार पर करते हैं कि उनके व्यक्तिगत शुक्राणु ‘X’ क्रोमोसोम (गुणसूत्र) अथवा ‘Y’ क्रोमोसोम (गुणसूत्र) हैं। ‘X’ गुणसूत्र माँ (माता) के X’ गुणसूत्र संयोजन के कारण एक बच्ची (‘XX’ गुणसूत्र) के जन्म का कारण तथा ‘Y’ गुणसूत्र माता में पुत्र बच्चा के उत्पत्ति का कारण (‘XY’ गुणसूत्र) के साथ संयोजन होता है

प्रश्न: कौन से माता-पिता एक संतान के लिङ्ग निर्धारण करने के लिए उत्तरदायी हैं, तथा क्यों?

उत्तर: ‘XY’ गुणसूत्र लिंग-निर्धारण प्रणाली में, स्त्री को प्रदत्त करने वाली डिंब ‘X’ गुणसूत्र में योगदान करता है व पुरुष-प्रदत्त शुक्राणु ‘X’ गुणसूत्र अथवा ‘Y’ गुणसूत्र में योगदान देता है, जिसके परिणामस्वरूप बच्ची (‘XX’ गुणसूत्र) होती है अथवा पुत्र (‘XY’ गुणसूत्र) की उत्पत्ति का कारण बनाता है क्रमशः। पुरुष पिता में हार्मोन का स्तर मनुष्य में शुक्राणु के लिङ्ग के अनुपात को प्रभावित करता है।

प्रश्न: ‘XXY’ गुणसूत्र क्या लिङ्ग है?

उत्तर: साधारणतः नारी में दो ‘X’ गुणसूत्र (‘XX’ क्रोमोसोम) विद्यमान होते हैं। नर में ‘X’ एवं ‘Y’ (’XY’ गुणसूत्र) होते हैं। किन्तु दुर्लभ अवस्था में एक पुरुष बच्चे का जन्म एक अतिरिक्त ‘X’ गुणसूत्र (‘XXY’ गुणसूत्र) के कारण होता है। यह क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम है।

प्रश्न: लिङ्ग तादात्म्य (पहचान) कैसे निर्धारित किया जाता है?

उत्तर: लिङ्ग तादात्म्य (पहचान) व्यक्ति की अपनी लिङ्ग की व्यक्तिगत भावना है। लिङ्ग तादात्म्य (जेंडर आइडेंटिटी) जन्म के समय नियत अथवा प्रदत्त किए गए लिङ्ग से संबंधित हो सकती है या इससे अलग होने की संभावना है। सभी समाज में लिङ्ग श्रेणियों का एक समूह है जो समाज के अन्य सदस्यों के संबंध में एक व्यक्ति की सामाजिक पहचान के गठन के आधार के रूप में कार्य कर सकता है।

प्रश्न: एक पुरुष के एक नर की निर्धारण का क्या कारण है?

उत्तर: अधिकांश स्तनधारी पुरुष, जिनमें नर मानव शामिल हैं, में ‘Y’ गुणसूत्र होता है, जो पुरुष प्रजनन अङ्गों के विकास होने देने के लिए टेस्टोस्टेरोन की बड़ी मात्रा में उत्पादन के लिए कोड देता है।

प्रश्न: कितने लिङ्ग को मान्यता प्राप्त हैं?

उत्तर: यह आपका सामाजिक विषय है कि आप केवल दो लिङ्गों को पहचानते हैं। ” किन्नर या हिजरा (नपुंसक) ने तृतीय लिङ्ग के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए सामाजिक आंदोलन (अभियान) चलाया था और वर्ष २००५ में, भारतीय पासपोर्ट आवेदन फॉर्म तीन लिङ्गों विकल्पों के साथ अद्यतनीकरण (अपडेट) किए गए। : ‘एम’, ‘एफ’, और ‘ई’ (अर्थात, पुरुष के लिए ‘एम’, महिला के लिए ‘एफ’ और यूनक के लिए ‘ई’, क्रमशः)।

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